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अम्बेडकर मेमोरियल हॉल में संविधान दिवस पर गोष्ठी के आयोजन में कई गणमान्य नागरिक शामिल हुए।

रमेश मित्तल नवभारत news 24 छत्तीसगढ़

दल्लीराजहरा/ भारतीय संविधान को भारत देश की जनता के द्वारा अंगीकार किए हुए 75 वर्ष पूर्ण होने के पावन अवसर पर दल्ली राजहरा के अंबेडकर मेमोरियल हाल में प्रबुद्ध जनों के द्वारा संविधान दिवस का आयोजन कर संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों, भागों, एवं अनुसूचियों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस परिचर्चा में नागपुर से पधारे मोहम्मद अब्दुल रज्जाक जो महाराष्ट्र आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के प्रखर वक्ता है छत्तीसगढ़ बुद्धिस्ट सोसाइटी के उपाध्यक्ष हेमंत कांडे संविधान विज्ञ प्रमोद कावडे एवं धीरज उपाध्याय मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित होकर दल्ली राजहरा के प्रबुद्ध जनों के समक्ष विचार गोष्ठी के माध्यम से अपनी बातें रखी।
मुख्य वक्ता के रूप में पधारे मोहम्मद अब्दुल रज्जाक जी ने संविधान के संबंध में बताते हुए कहा कि देश का संविधान एक ऐतिहासिक दस्तावेज है जिसमें कुल 22 भाग 8 अनुसूचियां एवं 395 अनुच्छेद है जो समय-समय पर संविधान में हुए संशोधन में के माध्यम से अब बढ चुके हैं संविधान में एक संप्रभुता समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य की संकल्पना की गई है नागरिकों के लिए सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय और अवसर की समानता और बंधुत्व के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया है ताकि व्यक्तित्व की गरिमा और राष्ट्र की एकता सुनिश्चित रह सके हमारे संविधान में समानता स्वतंत्रता शोषण के खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता सांस्कृतिक और शैक्षिक स्वतंत्रता सार्वभौमिक उपचारों की व्यवस्था की गई है सरकार के कार्य का नियंत्रण और संतुलन बनाए रखने की भी व्यवस्था की गई है साथ ही मौलिक कर्तव्य भी जोड़े गए हैं। गोष्टी को संबोधित करते हुए प्रमोद कावडे जी ने संविधान निर्माण की प्रक्रिया को बताया कि लोकतंत्र की सफलता के लिए जरूरी है कि जनता को शासन करने के लिए मिली शक्ति का विकेंद्रीकरण हो और जनता से सलाह मशवीरा भी लगातार होता रहे इसमें नियमित रूप से जांच और संतुलन की व्यवस्था भी होनी चाहिए इस हेतु संविधान निर्माता डॉ बाबासाहेब अंबेडकर ने न्यायपालिका विधायिका कार्यपालिका को लोकतंत्र का आधार स्तंभ बताया है। वही बालोद से आए हुए प्रखर वक्ता धीरज उपाध्याय जी ने बताया कि हमारे देश का संविधान में एक बड़ी विशेषता यह है कि यह कठोर भी है और लचीला भी इसमें परिवर्तनशील समय के अनुरूप आवश्यकता पड़ने पर संशोधन का भी प्रावधान अनुच्छेद 368 के माध्यम से दिया गया है अनुच्छेद 368 के माध्यम से संशोधन की व्यवस्था स्वयं अनुच्छेद 368 में भी संशोधन की गुंजाइश बनाता है । हमारे संविधान निर्माता ने देश पर अपनी इच्छाओं और विचारों को लादा नहीं बल्कि अपनी दूरदर्शिता से भावी पीढ़ी के लिए यह गुंजाइश छोड़ी कि वह अपने समय की परिस्थितियों अपने समय के ज्ञान एवं वैज्ञानिकता के आधार पर आवश्यकता होने पर इसमें समय अनुसार संशोधन कर सकें।
वक्ता के रूप में बोलते हुए डौंडी लोहारा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक जनक लाल ठाकुर ने मौलिक अधिकारों पर जोर देते हुए कहा कि हमारे मौलिक अधिकार हमारी रक्षा करते हैं और यही संविधान की विशेषता है कि चाहे वह किसी वर्ग का हो मजदूर हो या सर्वहारा वर्ग हो किसी भी जाति धर्म का हो संविधान सबको समानता पाने का अधिकार प्रदान करता है। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कार्यक्रम के अध्यक्ष हेमंत पांडे जी ने कहा कि भारत की एकता और अखंडता की रक्षा समाज में सद्भाव को बढ़ावा देना महिलाओं की गरिमा सुनिश्चित करना सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और राष्ट्र को नई ऊंचाइयों पर पहुंचना नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों में शामिल है और नागरिकों को उनके कर्तव्यों के अलावा मूल अधिकार जो प्रदान किए गए हैं वह भारत के नागरिकों की सबसे बड़ी ताकत है और ऐसी ताकत अपने नागरिकों को प्रदान करना भारतीय संविधान की विशेषता है। हेमंत कांडे जी ने अपने उद्बोधन में आगे बताया कि भारत का संविधान का निर्माण में बाबा साहब अंबेडकर के संघर्ष की कहानी भी है उन्हें संविधान सभा में जाने से रोकने की साजिश भी की गई लेकिन में संघर्ष करते हुए संविधान सभा में पहुंचे उन्हें संविधान प्रारूप समिति का अध्यक्ष भी बनाया गया परिणाम स्वरुप हमें क्षमता स्वतंत्रता बंधुता और न्याय से समावितित संविधान मिला और यह संविधान बाबा साहब के कई वर्षों के संघर्ष का परिणाम है।
कार्यक्रम आरंभ के पूर्व संचालक रतिराम कोसमा के द्वारा संविधान की प्रस्तावना का पठन किया गया साथ ही संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों की जानकारी देते हुए बताया कि पिछड़ा वर्ग अनुसूचित जाति एवं जनजाति के हितों की रक्षा के लिए भी संविधान में अनुच्छेद 340 अनुच्छेद 341 एवं अनुच्छेद 342 में इन वर्गों के संरक्षण का समावेश करते हुए। संविधान में देश के प्रत्येक नागरिक के हितों का ख्याल संसदीय प्रणाली के संचालन न्यायपालिका के कर्तव्यों अधिकारों कार्यपालिका के कर्तव्य एवं अधिकारों की भी विस्तार से विवेचना की गई है। कार्यक्रम में मुख्य रूप से शिरोमणि माथुर अशोक बाम्बेश्वर के ईश्वर राव रवि जायसवाल तिलक मानकर संतोष घराना जगदीश श्रीवास राजकुमार साहू विल्सन मैथ्यू जुबेर अहमद गुड्डन हनीफ कुरैशी हाशिम कुरैशी संतोष मेश्राम रामजतन भारद्वाज चंद्ररेखा बामेश्वर कुलदीप नोन्हारे कृष्णा यादव किशोर बागेश्वर ओम प्रकाश रामटेके जेबा कुरैशी तंजीला खान लक्ष्मण प्रसाद शर्मा मुकेश पटेल संजय रावत जितेंद्र मेश्राम दिलीप रंगारी शमीम अहमद सिद्दीकी एवं साथी उपस्थित रहे।
रतिराम कोसमा

Ramesh Mittal

Chief Editor, navabharatnews24.com

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