सेलम बस्ती में स्थापित 100 बिस्तर अस्पताल में ना ही दवाइयां है ना ही नियमित डॉक्टर, नगरवासियों के लिए सिर्फ झुनझुना साबित हो रहा है।

रमेश मित्तल संपादक नवभारत news 24 छग.
दल्लीराजहरा/ शहर की 50 हजार आबादी के लिए एकमात्र शासकीय 100 बिस्तर अस्पताल के संबंध में निरन्तर आम जनता की शिकायते प्राप्त होती आ रही थी जिस पर राजहरा व्यापारी संघ के अध्यक्ष गोविंद वाधवानी के आह्वान पर नगर के पत्रकार गण अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। वहां की स्थिति जैसे लोगों के द्वारा बताई जा रही थी उसके अनुरूप ही देखने को मिली। अस्पताल में मात्र एक संविदा डॉक्टर एक शासकीय नर्स 3 एन एम ए नर्स और दो वार्ड बॉय और दो स्वीपर के भरोसे संचालित हो रही है। अस्पताल का समय सुबह 8:00 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक है। लेकिन लोग बताते हैं कि सुबह 8:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक एवं शाम को 4:00 बजे से लगभग 6:00 बजे अस्पताल बंद हो जाता है। रात्रि में यदि कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए तब उन्हें निजी अस्पतालों में ही जाना पड़ेगा।
शहर की आधी आबादी वार्ड नं 10 से वार्ड नं 19 में ही रहती है जो श्रमिक बाहुल्य है यह 100 बिस्तर अस्पताल वार्ड नं 16 एवं 17 के मध्य पड़ता है यहां ज्यादातर श्रमिक, मजदूर, किसान एवं रोज देहाडी करके जीवन यापन करने वाले लोग ही रहते है जिनके पास सीमित संसाधन होते है उनके इलाज के लिए एकमात्र यह शासकीय अस्पताल ही सहारा है लेकिन अस्पताल में ना ही डॉक्टर नियमित है ना ही दवाइयां पर्याप्त है अस्पताल में कोई भी लैब,एक्स रे की सुविधा नही छोटी मोटी बुखार सर्दी खाँसी बीमारियों का ही इलाज हो पाता है थोड़ी भी बड़ी समस्या हो तो तुरंत मरीज को रिफर कर दिया जाता है क्योंकि यहां कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं है यह सिर्फ एकमात्र रेफर सेंटर बना हुआ है यह सेलम बस्ती में निवास करने वालो व शहर वासियों के साथ 100 बिस्तर अस्पताल के नाम पर सरासर अन्याय हो रहा है इस 100 बिस्तर अस्पताल में कोई एंबुलेंस की भी सुविधा नहीं है जिससे मरीज को प्राइवेट गाड़ी करके ही बाहर जाना पड़ता है।
अस्पताल में एक संविदा डॉक्टर बी एन मेडिया के भरोसे पूरा अस्पताल संचालित हैं। मरीज को देखने के लिए समय-समय पर शासन के द्वारा डॉक्टर भेजा जाता है। कई बार किसी कारणवश डॉक्टर नहीं आ पाता तब मरीजों की जिम्मेदारी अस्पताल के नर्सों के ऊपर ही होती है। पिछले कुछ दिनों पहले डॉक्टर लेडिया निजी काम से 10 दिन के लिए बाहर गए थे तब यह शासकीय अस्पताल बिना डॉक्टर के ही संचालित हो रहा था। स्टाफ की कमी होने के कारण शासकीय छुट्टी के दिनों में अस्पताल बंद रहता है। वार्ड बॉय के द्वारा ही मरीजों की रजिस्ट्रेशन होता है।
राजहरा व्यापारी संघ के अध्यक्ष गोविंद वाधवानी से हॉस्पिटल के संबंध में चर्चा किया गया तब उन्होंने बताया कि शासन ने शहर वालों के साथ छलावा किया है हमने सर्व सुविधा युक्त 100 बिस्तर अस्पताल की मांग रखी थी। वह इसलिए क्योंकि नगर से सभी मल्टीस्पेशलिटी अस्पतालों की दूरी लगभग 100 किलोमीटर की आसपास है गंभीर मरीज को वहां तक ले जाने में कई मरीज बीच रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं हमारी मांग पर तब प्रशासन सर्व सुविधा युक्त अस्पताल देने का वादा किया था । जिसके लिए 7 करोड़ रुपए की राशि डी एम एफ फंड से खर्च की गई। आज अस्पताल की स्थिति देखें तो ना तो अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ है और ना हीं पूरी सुविधा। अस्पताल भी ऐसी जगह में बनी है जहां मरीजों का आना-जाना बहुत ही कम है इसको नगर के बीएसपी अस्पताल की जो ओपीडी बंद पड़ी है उस हिस्से में खोला जाए। ताकि लोगों को आने-जाने में सुविधा हो और समय पर इलाज भी करा सके । यह दल्ली राजहरा के लिए बहुत बड़ी विडंबना की है कि यह शहर शासन को 1000 करोड़ रुपया से अधिक की राशि डी एम एफ फंड से प्रतिवर्ष देती है। इसका उपयोग शासन नगर वासियों के लिए ना करके जिले से बाहर के ग्राम और शहरों के लिए उपयोग में कर रही है। और यहां के लोग को झुनझुना पकड़ाने का काम प्रशासन कर रही है। यदि स्थिति नहीं सुधरता है तो आने वाले कुछ दिनों में एक भयानक आंदोलन किया जाएगा जिससे प्रशासन को पता चल सके की नगर वासियों के साथ छलावा करने का परिणाम क्या होता है।
पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष व कांग्रेस के जिला महामंत्री रवि जायसवाल ने कहा कि 100 बिस्तर अस्पताल पूर्ण सुविधा से लेस हो तभी कोई भी मरीज इलाज कराने जायेगा लेकिन अगर इसी स्थिति में अस्पताल को अगर BSP के अस्पताल में भी शिफ्ट कर दिया जाए तो वहां भी कोई व्यक्ति नहीं जायेगा अतः इम्पोर्ट बात यह है कि 100 बिस्तर अस्पताल में सर्व सुविधा प्राप्त हो जिसमें डॉक्टर नर्स, दवाइयों, पैथालॉजी लेब, एक्स रे, सोनोग्राफी मशीने हो कोई दुर्घटना ग्रस्त या एमरजेंसी मरीज हो उसका अच्छे से प्राथमिक उपचार हो तभी इस 100 बिस्तर अस्पताल की सार्थकता है अन्यथा यह नगरवासियों के लिए सिर्फ झुनझुना ही है।



