माँ झरन मैय्या प्राचीन मंदिर में चैत्र नवरात्रि पर प्रज्वलित हुई आस्था व विश्वास की मनोकामना ज्योति।

रमेश मित्तल संपादक नवभारत news 24 छग.
दल्लीराजहरा/ माँ झरन मैय्या प्राचीन मंदिर दरबार में मंदिर पुनर्निर्माण के पश्चात 41वा नवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है जहां प्रतिवर्ष की भांति पंडित गणेश शर्मा ने अभिजीत मुहर्त 11.36 से 12.24 में आस्था के ज्योत प्रज्वलित कराए मंदिर के चैत्र नवरात्रि एवं क्वार नवरात्रि दोनों पर्वो में मनोकामना ज्योति प्रज्वलित की जाती है इस वर्ष कुल 43 ज्योति प्रज्वलित हुई जिसमें 8 घृत ज्योति व 35 तेल मनोकामना ज्योति है मंदिर के पंडा पंडित नर्मदा प्रसाद दुबे व मंदिर के पुजारी अवध प्रसाद तिवारी पूरे नो दिनों तक दिन रात अपनी सेवा देते है।
माँ झरन मैय्या इस नगर का सबसे प्राचीन मंदिर है जहां मात्र एक चबूतरा बना हुआ था जिसमें शिवलिंग नंदी बैल व कई देवी देवताओं की राजा महाराजा सैनिक वेशभूषा में मूर्तिया रखी हुई थी मंदिर के दोनों छोरो पर प्राकृतिक झरनों के अथाह जलकुंड है जहां इस नगर की बसाहट में लोगों के लिए एकमात्र पीने का पानी व निस्तारी का साधन मात्र था यहां निरन्तर बारहो माह सदियों से प्राकृतिक जल बह रहा है।
माँ झरन मैय्या मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए समिति का गठन हुआ जिसके प्रथम अध्यक्ष रमेश मित्तल बने जो निरन्तर 12 साल तक इस पद पर रहे जिनके नेतृत्व में मंदिर का नवनिर्माण वर्ष 2005 में प्रारंभ हुआ मंदिर निर्माण 2007 में पूर्ण हुआ तब प्रथम बार चैत्र नवरात्रि में भव्य प्राण प्रतिष्ठा के साथ मनोकामना ज्योति प्रज्वलित की गई जो निरन्तर प्रज्वलित हो रही है मंदिर में एक वर्ष में तीन भंडारा जिसमे दोनों नवरात्रि की नवमी तिथि एवं महाशिवरात्रि को कराया जाता है मंदिर निर्माण से वर्तमान तक लगातार दानदाताओं का सहयोग मंदिर समिति को मिलता आ रहा है समिति के सक्रिय सदस्य व पदाधिकारी रमेश मित्तल मुख्य संरक्षक व मंदिर प्रभारी, महेश सहारे अध्यक्ष, प्रीतम साहू उपाध्यक्ष, नरोत्तम सागर सचिव, मनीष पाठक सह सचिव, सोहन भारद्वाज कोषाध्यक्ष, अरुण कुमार अरोरा सह कोषाध्यक्ष, ठाकुर राम रावटे, मनोज, दिलीप, सेवा सदस्य सोनू साहू, खिलेश साहू, पटेल व अन्य है साथ में माँ झरन मैय्या महिला समिति के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका से सभी कार्य सम्पूर्ण होते आ रहे है।



