रमेश मित्तल चीफ एडिटर नवभारत news 24 छग.

बंगाली समाज का नव वर्ष जो कि पोइला बोइशाख के नाम से जाना जाता है वर्ष(1433) है।
बंगाली समुदाय ने सुबह से ही इस पर्व का जश्न मनाया। इस दिन लोग पारंपरिक पहनावे (साड़ी-धोती) में नजर आए।
पूजा और परंपरा: लोगों ने सुबह मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना की और अपने घरों को सजाया। इस दिन को अत्यंत शुभ माना जाता है, इसलिए कई लोग नया व्यवसाय या कार्य शुरू करते हैं।
पोइला बैशाख पर बंगाली समुदाय को बधाई दी और नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं साझा कीं जाती है
सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है इसी कड़ी में बंगाली समाज द्वारा बंगाली क्लब मे गीत संगीत के साथ बच्चों का नृत्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें मंच संचालन मिठू कारफा के द्वारा किया गया।इसमें मुख्य अतिथि के रूप में समाज के अध्यक्ष श्री सुकांतो मंडल सचिव श्री कंनक बैनर्जी सचिव श्री मदन माइती श्री डाॅ सोइबल जाना सर श्री गगन पांड्या श्रीमती पुरोबी वर्मा श्री बी एन आईच श्री गौतम बेरा एवं समाज के सभी पदाधिकारी शामिल थे, मौजूद रही जो प्रतिभागी भाग लिए थे उन्हें प्रथम और दितीय आने पर उन्हें अतिथियों के द्वारा पुरस्कृत किया गया और वहां आए सभी समाज के लोगों ने पारंपरिक भोजन: का अपने परिवार और दोस्तों के साथ पारंपरिक बंगाली व्यंजनों का आनंद लिया।
शुभ नोबो बोरसो: एक-दूसरे को ‘शुभ नोबो बोरसो’ (नया साल मुबारक) कहकर बधाई दी गई।
पोइला बोइशाख का दिन न केवल नई शुरुआत का प्रतीक है, बल्कि यह बंगाली संस्कृति की जीवंतता और एकता को भी दर्शाता है।

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By Ramesh Mittal

Chief Editor, navabharatnews24.com

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