ग्राम मुकादाह में जन मुक्ति मोर्चा द्वारा संचालित नवजन वादी लोक कला नवाविहान के कलाकारों द्वारा जन गीत शहादत नाटक का मंचन किया गया।

रमेश मित्तल चीफ एडिटर नवभारत news 24 छग.
दल्लीराजहरा/ 1977 का जो मंजर रहा वो दिल दहला देने वाली बात थी, साथियों आज भले ही लोग इन शहादत को याद करे न करे पर जन मुक्ति मोर्चा संगठन द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 3 जून को शहीद साथियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, उनके कुर्बानी को याद कर शहीद के स्मारक पर दीप प्रज्वलित कर नारे बाजी के साथ क्रांति का कदम बढ़ाए, शोषण, जुल्म, अन्याय के खिलाफ शहीदों की राह पर कंधे से कंधे मिलाकर चलने की संकल्प लेते हुए, लाल हरा झंडा थामे रैली निकाली गई जिसमें दल्ली राजहरा सहित आस पास के ग्रामीण क्षेत्र के युवा बेरोजगार मज़दूर किसान, छात्र, नवजवान, सम्मिलित होकर शहीदों की अधूरे सपने को पूरा करने का एक हौसला जाहिर करते हुए, इंकलाब जिंदाबाद के नारों के साथ को कार्यक्रम को सफल बनाया। जिसमें जन मुक्ति मोर्चा के साथी ईश्वर निर्मलकर, पवन विश्वकर्मा, यादराम कोर्राम, पुसउ साहू, कुशल ठाकुर, सचिव बसंत रावटे नगर अध्यक्ष महेंद्र गंजीर सहित हजारों के संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।
इस कार्यक्रम के पश्चात रात्रि कालीन ग्राम मुकादाह में जन मुक्ति मोर्चा द्वारा संचालित नवजनवादी लोक कला मंच नवा बिहान के कलाकारों द्वारा जन गीत, शहादत नाटक का मंचन किया गया। जिसमें शहीद अस्पताल में सेवा दे रहे डॉक्टर वेद कुमार घंटाजी जी, डॉक्टर प्रिय राज दर्शनी, विष्णु प्रिय दर्शनी, सुधीर यादव, एवं जन मुक्ति मोर्चा के सचिव बसंत रावते जी, नगर अध्यक्ष महेंद्र गंजीर जी, कलीराम सलामे जी, रायसिंह मंडावी जी, महेश कोला, कृष्ण मुरारी राजू साहु सहित गांव के प्रमुख, मुखिया बड़े बुजुर्ग माताएं बहनें उपस्थित रहे।



