प्राकृतिक जल स्त्रोतों का संरक्षण व सदुपयोग नगरहित में किया जाये ;- महेंद्र गंजीर

रमेश मित्तल चीफ एडिटर नवभारत news 24 छग.
दल्लीराजहरा/ झरनों की इस लौह अयस्क नगरी का पुराना नाम झरन दल्ली ही था। इस नाम के पीछे यहाँ पर जगह जगह पर झरनों का होना है। आज भी प्राकृतिक जल स्त्रोत दल्ली राजहरा में तीन स्थानों पर, झरन मंदिर वार्ड नं. 12, कोण्डे वार्ड नं. 17, वार्ड नं 5 एवं पाँच पूल के आगे एवं पीछे पानी का स्त्रोत है। इन झरनों का पानी निरंतर बहता रहता है जिससे इसका समुचित उपयोग नहीं हो पाता है। इन झरनों के पानी को संग्रह कर राजहरा के निवासियों के लिए उपयोग में लाया जा सकता है।
वार्ड नं. 17 का जो दो जगह पानी का स्त्रोत रेल्वे पटरी के आगे पीछे है, जहाँ से पानी को एकत्र करके शहीद अस्पताल में पानी की जो गम्भीर समस्या है उसे दूर किया जा सकता है। इस अस्पताल में बहुत दूर-दूर से मरीज आते हैं, शहीद अस्पताल बालोद जिला का सबसे बड़ा अस्पताल है। जहाँ पर सबसे कम पैसों में ईलाज किया जाता है। इन जल स्त्रोतों से 15 से 20 मीटर की दूरी पर शहीद अस्पताल स्थित है, उसे पानी की आपूर्ति किया जा सकता है। सकारात्मक पहल करने इन प्राकृतिक जल स्रोतों से दल्लीराजहरा के नागरिकों को शुद्ध पानी मिल सकता है जिससे भीषण गर्मी के दिनों में भी दल्लीराजहरा शहर में पानी का संकट नही रहेगा।
अतः नगर पालिका परिषद, दल्ली राजहरा से निवेदन है कि इन जल स्त्रोतों का विशेष ध्यान देते हुए शहीद अस्पताल एवं राजहरा शहर के अनेको वार्डो में प्राकृतिक झरनों को इकट्ठा कर पानी की आपूर्ति कर इन प्राकृतिक झरनों को बचाने की कृपा करें।



