मोहर्रम पर दल्ली राजहरा में ज़िक्र-ए-शोहदाए कर्बला, तकरीर, नमाज़-ए-आशूरा और आम लंगर का हुआ आयोजन।

रमेश मित्तल चीफ एडिटर नवभारत news 24 छग.
दल्लीराजहरा:–“दीने नबी का डंका बजाया हुसैन ने, राहे खुदा में सर को कटाया हुसैन ने।
वो बेमिसाल सजदा किया है कि आज तक, सजदे से अपने सर को न उठाया हुसैन ने।”
माहे मोहर्रमुल हराम के अवसर पर दल्ली राजहरा में जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के तत्वावधान में “ज़िक्र-ए-शोहदाए कर्बला” कार्यक्रम का श्रद्धा और अकीदत के साथ आयोजन किया गया। कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों एवं युवाओं ने भाग लेकर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और शोहदाए कर्बला की कुर्बानियों को याद किया।
आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं के लिए दीनी तकरीर, ज़िक्र- ए- शोहदाए कर्बला तथा लंगर का विशेष आयोजन किया गया। इस दौरान यह संदेश दिया गया कि “इल्मे दीन हासिल करना हर मुसलमान मर्द और औरत पर फ़र्ज़ है।”
जामा मस्जिद दल्ली राजहरा में मोहर्रम के अवसर पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। 20 जून (4 मोहर्रम) को बाद नमाज़-ए-ईशा उलेमा-ए-किराम की तकरीर हुई, जिसकी निज़ामत मौलाना हकीक अहमद नूरी (नायब इमाम) ने की। इस अवसर पर *क़ारी अब्दुल बशीर अहमद रिज़वी* *(इमाम व ख़तीब)* एवं हाफ़िज़ व क़ारी गुलाम सिमनानी (उस्ताद, दारुल उलूम इमामे आज़म) ने तकरीर करते हुए कर्बला की कुर्बानियों पर प्रकाश डाला।
21 जून (5 मोहर्रम) को जामा मस्जिद में महिलाओं के लिए एक दिवसीय दुरूदख़ानी एवं तकरीर का आयोजन हुआ, जिसमें *आलिमा फ़ाज़िला कायनात फ़ातिमा रिज़वी एवं आलिमा फ़ाज़िला क़ारिया अमरीन फ़ातिमा रिज़वी* ने शोहदाए कर्बला के विषय पर प्रभावशाली बयान दिए।
10 मोहर्रम (26 जून) को जामा मस्जिद दल्ली राजहरा में नमाज़-ए-आशूरा अदा की गई। इसके पश्चात जुमे की नमाज़ के बाद इंतजामिया कमेटी, मुतवल्लियों एवं यंग मुस्लिम युवाओं के सहयोग से आम लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित लोगों को लंगर वितरित किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने लंगर में शामिल होकर फैज़ हासिल किया।
समापन अवसर पर उलेमा-ए-किराम ने मुल्क एवं प्रदेश की अमन-चैन, खुशहाली और भाईचारे के लिए विशेष दुआएँ कीं। इस अवसर पर मुस्लिम समाज लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।



